खुदीराम बोस…. निडर व हँसमुख

11 अगस्त 1908  को आज ही के दिन सबसे युवा स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस को मुजफ्फरपुर बिहार के केंद्रीय कारागार में फांसी दी गई। फांसी से थोड़ा समय पहले उन्हें आम खाने को दिया गया। आम उनके हाथों में पकड़ा कर जेलर वहाँ से चला गया। जब थोड़ी देर बाद जेलर लौटा तो उसने देखा कि आम खिड़की पर ज्यों का त्यों पड़ा हुआ था उसने खुदीराम बोस को कहा तुमने आम क्यों नही खाया जैसे ही उसने आम को हाथ लगाया वह पिचक गया। क्योंकि खुदीराम बोस ने आम खाकर बड़ी सफाई से उसमे हवा भर दी थी। जैसे ही जेलर के उठाने पर खाली छिलका पिचक गया तो खुदीराम जोर जोर से हंस पड़े। और जेलर गुस्सा होने की बजाय यह सोचने पर मजबूर हो गया कि कोई अपनी मौत की आखिर समय मे यह जानते हुए भी कि उसकी मौत तय है , वह इतना खुश और हंसमुख कैसे रह सकता है। जेलर कुछ बिना बोले वहाँ से चला गया।

तो दोस्तों ऐसे से हमारे खुदीराम बोस। यही बेखोफी का अंदाज था जिसने अंग्रेज़ो को भारत छोड़ने पर मजबूर किया।

खुदीराम बोस जी को मेरी आदरपूर्वक श्रंद्धाजलि

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नेता और उनके भत्ते….

कुछ दिन पहले भाजपा के युवा सांसद वरुण गाँधी ने लोकसभा प्रश्नकाल के दौरान सांसदों का वेतन भत्ता बढ़ाने पर मिले अधिकार पर सवाल खड़े किए और इसे नैतिक मूल्यों के खिलाफ बताया। उन्होंने एक बहुत महत्व्पूर्ण बिंदु का उल्लेख किया कि वर्तमान में एक सांसद को 15000 ₹ टेलीफोन भत्ते के रूप में दिया जाता है जबकि वर्तमान में सभी दूरसंचार कंपनियां 500 ₹ तक अनलिमिटेड कॉल्स और डेटा उपलब्ध करा रही है। ऐसे में सांसदों का 15000₹ लेना कहाँ तक न्यायसंगत है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इसके लिए एक समिति का गठन हो जो समय समय पर समीक्षा कर सके और यह बता सके कि कौन से गैर जरूरी भत्तों को हटाया जाना चाहिए।आज ही मैंने दिव्य हिमाचल अखबार में पढ़ा कि पूर्वमुख्यमंत्री की सुविधाएं बढ़ाने पर कैबिनेट ने असहमति जताई है पर वास्तव में इस प्रस्ताव पर असहमति जताने का मुख्य कारण भत्ते से बढ़ने वाला खर्च नही बल्कि चुनावी साल में प्रस्ताव लाने से जनता में रोष होने को लेकर है। प्रस्ताव के अनुसार सुविधाओं में एक डॉक्टर सहित एम्बुलेंस, काफिले की गाड़ी में एसयूवी गाड़ी, पसंद के दो सुरक्षा कर्मी, लेंड लाइन फ़ोन के लिए 50,000₹ प्रति वर्ष, आवास के बाहर आर्म्स गार्ड की सुविधा व अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए एक लाख रुपये अतिरिक्त देने की बात की गई है। जहाँ तक सुरक्षा की बात है तो समझौता नही किया जा सकता परन्तु फ़ोन बिल को 50000 से 10000 तक किया जा सकता है लैंडलाइन की जगह मोबाइल फ़ोन का प्रयोग कर। और जहाँ तक प्रशासनिक खर्चों की बात है तो पूर्वमुख्यमंत्री या पूर्वमंत्री के कार्य आम विधायक के लगभग ही होते है ऐसे में ऐसे खर्च बढ़ाना राजकीय खर्चे पर बोझ की तरह है। हम तो सिर्फ उम्मीद कर सकते है अपने सांसदों व विधायकों से की वे अपने निजी स्वार्थ छोड़ कर देश की जनता की भलाई में धन का सदुपयोग करेंगे।

@TheYogeshThakur

प्यार मेरा #PyarMera

आज भी याद है वो मेरी जिंदगी का प्यारा दिन जब मुझे एक दोस्त ने उस से मिलाया। उस की आवाज में एक गज़ब की सादगी थी और चेहरे पर भोलापन। मेरे पास सिवाय हेलो हाय करने के कोई और बहाना नही था। पर दिल जानता था कि ये दिल उसके रंगों में रंगने लगा है। और मैं इस दिल को रोक नही पाया क्योंकि मुझे उस वक़्त अपने दिल पे सबसे ज्यादा भरोसा था। वो कहते है ना “जिंदगी में एक ऐसा भी वक़्त आता है जब दिल को हर बात अच्छी लगती है सिवाय हकीकत के। वैसे भी कैसे रोकता इस दिल को दिल तो बस पंजाबी गाने की यही धुन गा रहा था ” तेरे नाल जदो निगाहां मिलियाँ, प्यार दियाँ उदो राहां मिलियाँ। हुन ऐ जहां की करना, मेनू तेरियां पनाह मिलियाँ।​

क्या दिन थे वो भी….

जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मकां वो फिर नही आते…. वो फिर नही आते…. किशोर दा की आवाज में गाए इस गीत की एक एक पंक्ति का आज भी उतना ही महत्व है तर्कसंगत है जितना उस जमाने में रहा होगा। क्योंकि सब चाहे पुराने जमाने का हो या मेरे जमाने का वो एक बार बीत जाए तो लौट के नही आता। वो दोस्त कुछ को हम भूल जाते है कुछ याद रह जाते है पर कुछ वैसा नही रहता तो वो है दोस्ती वो प्यार जो उस समय होता था। मैं अपने कॉलेज के दिनों की बात कर रहा हूँ वो समय कितना कीमती था ये आज पता चलता है। “काश की कुछ ऐसा हो जाए, वो कॉलेज के पुराने दिन लौट आये”। अगर ऐसा हो तो क्या करोगे? मेरी बात करूं तो तो मैं हर उस हिस्से को खुल ले जियूँगा जिसे उस वक़्त नही जी पाया। उसके बाद उन सब से माफी जिसका किसी कारणवश मेरे से दिल दुखा हो या किसी से लड़ाई झगड़ा हुआ हो।

जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मकां वो फिर नही आते…. वो फिर नही आते…. किशोर दा की आवाज में गाए इस गीत की एक एक पंक्ति का आज भी उतना ही महत्व है तर्कसंगत है जितना उस जमाने में रहा होगा। क्योंकि सब चाहे पुराने जमाने का हो या मेरे जमाने का वो एक बार बीत जाए तो लौट के नही आता। वो दोस्त कुछ को हम भूल जाते है कुछ याद रह जाते है पर कुछ वैसा नही रहता तो वो है दोस्ती वो प्यार जो उस समय होता था। मैं अपने कॉलेज के दिनों की बात कर रहा हूँ वो समय कितना कीमती था ये आज पता चलता है। “काश की कुछ ऐसा हो जाए, वो कॉलेज के पुराने दिन लौट आये”। अगर ऐसा हो तो क्या करोगे? मेरी बात करूं तो तो मैं हर उस हिस्से को खुल ले जियूँगा जिसे उस वक़्त नही जी पाया। उसके बाद उन सब से माफी जिसका किसी कारणवश मेरे से दिल दुखा हो या किसी से लड़ाई झगड़ा हुआ हो।

यादें :- Samarhill To Baluganj…..

आज फ़िर वो वक्त याद आ गया जब साथ चले थे..क्या दिन था वो भी|वो पांच सात मिनट के रास्ते में आधा घंटा लगा पर ये कोई रणनिती के तहत नही महज एक संयोग ही था| शायद न वो चाहती थी कि ये रास्ता ख्त्म हो और न मैं |आज किसी काम से बालुगंज जाना था तो कंडक्टर के ॿार बार आवाज देने पर भी मन नही किया सोचा क्यू न पैदल चल लिया जाए क्या पता चलते चलते वो गुजरा कल मिल जाए|यादें भी बडी कमाल होती हैं ये कभी साथ नहीं छोडती काश इन यादों की तरह वो भी हमेशा साथ रहती……

काश मैं कह पाता उसे…….
दिल भरता नही आँखे रजती नही,

चाहे कितना भी देख के जाऊं,

वक्त जाए मैं रोक न पाऊं,

तू थोडी देर और ठहर जा….

तू थोडी देर और ठहर जा….